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✍️ लेखन: हेमंत कुमार मेघवाल
प्रेम की भाषा का व्याकरण
बड़ा ही मौन होता है
प्रेम की भाषा का व्याकरण
जहाँ बिना कुछ कहे
समझ ली जाती है
एक-दूसरे के मन की हर बात
जहाँ बिना कुछ बोले
बाँट लिए जाते हैं
एक-दूसरे के सुख और दुःख
प्रेम की इस अनजानी भाषा में
जहाँ मौन ही बोल भी रहा होता है
और मौन ही सुन भी रहा होता है
क्योंकि प्रेम की भाषा होती है
मौन की भाषा ।
स्रोत : नवपल्लव के लिए हेमंत कुमार मेघवाल द्वारा चयनित कविताओं में से एक कविता।
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