कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: हेमंत कुमार मेघवाल
पितृसत्ता और पूर्वकालिक स्त्री
अगर रचा होता तथाकथित धर्मों ने
महिलाओं का भविष्य
तो आज भी स्त्रियाँ होतीं
पुरुष वर्ग की असमानता का उदाहरण
घरों में थका देने वाले कामों में उलझी
बर्तन माँजती
और घर की चार दीवारों में ही सिमटी हुई
पर ऐसा है नहीं
समाज का भविष्य बदला है
हमारे संविधान ने
संविधान ने लिखा है
महिलाओं का नया इतिहास
उन्हें दी है समानता
अधिकार, अवसर और पहचान ।
तभी तो आज
वही स्त्री पहुँची है चाँद तक
और हर क्षेत्र में खड़ी है
पुरुषों के समान
सक्षम होकर
अपनी योग्यता से ।
स्रोत : नवपल्लव के लिए हेमंत कुमार मेघवाल द्वारा चयनित कविताओं में से एक कविता।
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