कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: हेमंत कुमार मेघवाल
दीवार में एक खिड़की
दीवार में एक खिड़की होनी चाहिए
जहाँ से सपनों की उड़ान निकले
न हो सिर्फ ईंटों का बोझ जिसमें
कुछ हवाओं की पहचान भी निकले
जहाँ से आ सके सूर्य की मंद-मंद किरणें
और चिड़ियों की चहचहाहट भी
आ सके समाज के नए विचार जहाँ से
और साथ मैं बच्चों के खेल की आहट भी
दीवारें न कर दें हमें प्रकृति से यूँ सख्त जुदा
इसीलिए हर दीवार में
एक खिड़की होनी चाहिए सदा !
स्रोत : नवपल्लव के लिए हेमंत कुमार मेघवाल द्वारा चयनित कविताओं में से एक कविता।
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