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‘कहकशां : अकबर इलाहाबादी’ उर्दू के प्रसिद्ध शायर अकबर इलाहाबादी की क्लासिकल शायरी का एक आकर्षक संग्रह है। अकबर इलाहाबादी अपनी अनोखी शायरी, तीखे व्यंग्य, हास्य और सामाजिक दृष्टि के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने अपने दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को शायरी के माध्यम से बेहद दिलचस्प और प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। अकबर की शायरी में जहाँ एक ओर हास्य और व्यंग्य की चुटीली धार दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर समाज, बदलते जीवन-मूल्यों, आधुनिकता और मानवीय व्यवहार पर उनकी गहरी नज़र भी दिखाई देती है। उनके अशआर पाठक को मुस्कुराने के साथ-साथ सोचने के लिए भी मजबूर करते हैं। उनकी भाषा सहज, प्रभावशाली और संवादात्मक है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े विषयों को उन्होंने ऐसे अंदाज़ में प्रस्तुत किया कि उनकी शायरी आम पाठक के लिए भी रोचक बनी रहती है। सामाजिक विसंगतियों पर उनकी पैनी टिप्पणी और हास्यपूर्ण अंदाज़ उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाता है। ‘कहकशां : अकबर इलाहाबादी’ उन पाठकों के लिए उपयोगी संग्रह है जो क्लासिकल उर्दू शायरी के साथ-साथ व्यंग्य, हास्य, सामाजिक चेतना और अकबर इलाहाबादी के विशिष्ट अंदाज़-ए-बयाँ को पढ़ना चाहते हैं।
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| Writer/Author | Akbar Allahabadi, Editor : Nadeem Farrukh |
| ISBN | 9788199277991 |
| Edition | First |
| Publisher | Sukhandaan Publications |
| Binding Type | Paperbacks |
| Language | Hindi |
| Weight | 320 g |
| Dimensions | 22×15×2 |
कहकशां : अकबर इलाहाबादी प्रसिद्ध शायर अकबर इलाहाबादी की चुनिंदा क्लासिकल शायरी का संग्रह है। उनकी शायरी में व्यंग्य, हास्य, सामाजिक चेतना और जीवन की सच्चाइयों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिलती है। उर्दू शायरी प्रेमियों के लिए एक खास संग्रह।
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